डरावनी भुतिया काहिनी - Hindi Horror Story | Short Hindi Horror Story


Hindi Horror Story | Short Hindi Horror Story


कॉलेज का उस रात - Hindi Horror Story

बात उन दिनों की है जब मैं कॉलेज का स्टूडेंट था। अपने कॉलेज की ओर से हम सभी कैम्प के लिए एक जंगल में गए थे।

हलकी ठंढ थी ; अत: रात में हम सबने पूरी रात कैम्प – फायर के साथ डांस करने, गाने आदि का प्रोग्राम तय किया। 

मुझे और सभी साथियों को कैम्प फायर के लिए लकडियाँ इकट्ठी करने का भार सौंपा गया। मैं निकला तो सबके साथ ही लेकिन जंगल के प्राकृतिक सौन्दर्य में भटकता हुआ अकेले बहुत दूर कहीं निकल गया।

अचानक आसमान बादलों से भर गया और गरज के साथ बारिश होने लगी। बादलों के लगातार गरजने से मैं पेड़ के नीचे खड़ा रहना मुनासिब न समझ आसपास किसी घर की तलाश में एक दिशा में भागने लगा। 

मुझे कुछ ही दूरी पर एक लाल ईंटों से बनी शानदार बिल्डिंग नजर आई, बिल्डिंग रोशनी से पूरी नहाई हुई थी और उसमें ढेर सारे लोग हैं – ऐसा दूर से ही लग रहा था। 

मैं तेजी से भागते हुए उस बिल्डिंग में जा घुसा और सामने से आती हुई एक खुबसूरत नर्स से टकराते – टकराते बचा। नर्स ने मुझे घूर कर देखते हुए कहा – “ बहुत अधिक भीग गए हो, सर्दी लग जायेगी।

उधर बाईं ओर एक स्टोर रूम है ; वहां जाकर जो भी मिले उससे कहना सिस्टर जूलिया ने दुसरे सूखे और साफ़ कपडे मुझे देने को कहा है – वह तुम्हे कपडे दे देगा।

मैं हक्का – बक्का मुंह फाड़े सिस्टर जूलिया को देखता रहा। मुझे एकदम से यह समझ नहीं आया कि मैं क्या करूँ। 

मेरी स्थिति देखकर सिस्टर जूलिया खिलखिलाकर हंस पड़ी और बोली – 

“पहले तो तुम अपना मुंह बंद करो वरना मुंह में मच्छड घुस जायेंगे और अब जाकर वीसा ही करो जैसा मैं ने कहा है।” 

मैं हलके से, हाँ में सर हिला सिस्टर की बताई दिशा में जाने को मुद गया।

अभी कुछेक दस कदम ही चला होउंगा कि मेरे कंधे पर किसी ने हाथ रखा। मैं चौंककर पीछे मुदा और अपने सामने आर्मी की वर्दी में एक युवक को खडा मुस्कुराता पाया।

मेरे चेहरे पर आश्चर्य का बादल अपना घर बना चुका था ; जिसे देखते ही उस युवक को हंसी आ गई। उसने धीमे ,किन्तु दृढ स्वर में कहा – “ मैं कैप्टन विनोद हूँ और यह हमारे देश की आर्मी का हॉस्पिटल है।

कैप्टन विनोद की बातों ने मुझे आश्वस्त किया। मैं अब धीरे – धीरे सामान्य हो गया और मैं ने कैप्टन विनोद को सिस्टर जूलिया की कही बातें बताई।

सुनकर ,कैप्टन विनोद के चेहरे पर रहस्यमयी मुस्कान फ़ैल गई और वे बोले – “ तो सिसितर जूलिया से भी मिल चुके।” 

“ जी , क्या मतलब है आपका ?” 

“ कुछ नहीं ,चलो मैं तुम्हे सूखे कपडे देता हूँ चेंज कर लो नहीं तो सच में सर्दी लग जायेगी।” और मैं कैप्टन विनोद के पीछे – पीछे एक बड़े से कमरे में पहुँच गया। कमरे के चारो ओर हरे रंग के परदे लगे हुए थे। , 

एक ओर एक बड़ा सा बेड पडा हुआ था और उसके सामने एक सोफा था। बीच में एक टेबल था जिस पर दो ग्लास ,एक बड़ी बोतल ब्रांडी की और एक या दो पत्रिकाएं पड़ी हुई थीं। 

कमरे के एक कोने में एक बड़ी सी अलमारी थी ;जिसमें से कैप्टन विनोद ने एक आसमानी रंग का कुरता – पायजामा निकालकर मुझे दिया और कमरे से लगे बाथरूम की ओर इशारा किया।

मैं बाथरूम से कपडे चेंज कर जैसे ही निकलने लगा मेरी नजर बाथरूम की एक दीवाल पर पड़ी।

वह खून के छींटों से भारी हुई थी। यह देखकर मैं घबडा गया और जल्दी से बाहर निकलने को मुदा कि बाथरूम में लगे आईने में खुद को ही देखकर चौंक गया। 

आईने में मेरा पूरा शरीर तो नजर आ रहा था लेकिन मेरे शरीर पर से मेरा सर गायब था। 

अब मुझे डर लगने लगा और मैं हडबडा कर बाथरूम से निकल गया।

मुझे इस तरह बाहर निकलते देख कैप्टन विनोद ने हंसकर पूछा – “ क्या हुआ ? अरे हाँ ,तुम ने तो अब तक मुझे अपना नाम ही नहीं बताया।” 

“ कहाँ जाओगे ,बाहर बहुत तेज बारिश हो रही है। लेकिन, तुम जाना क्यों चाहने लगे अचानक यह मैं समझ नहीं पा रहा हूँ।” 

“ कैप्टन विनोद आपकी बाथरूम की एक दीवाल पूरी खून के छींटों से भरी हुई है। और और आपके बाथरूम में लगा आईना भी कुछ अजीब सा है।

मुझे मेरा पूरा शरीर तो दिखाई दिया लेकिन मेरा सर ही गायब था। मैं अब बिलकुल भी नहीं रुकुंगा यहाँ।

बारिश में ही भीगता हुआ अपने कैम्प तक जाऊँगा।” रहते हुए मैं कमरे से बाहर जाने वाले दरवाजे की ओर बढ़ा।

“ रुको “ तभी कैप्टन विनोद की कडकती आवाज गूंजी “ तो तुमने सबकुछ देख ही लिया।” 

“जी क्या मतलब है आपका ?” मेरी आवाज में डर भर गया था। “ मतलब चाहे जो हो, तुम तब तक यहाँ से नहीं जा सकते जबतक मैं तुम्हे कुछ बता न दूं।” 

“ क्या बताना चाहते हैं आप ?”

“ जो आजतक कोई न जान सका” 

“ जो आज तक कोई न जान सका वह मैं जानकार क्या करूंगा। प्लीज ,अब मुझे जाने दें।” – मैं डर से रुआंसा हो गया।

“नहीं , बिलकुल भी नहीं। और , तुम्हे मुझसे डरने की भी कोई जरुरत नहीं।

सैनिक सबकी रक्षा के लिए होते हैं। मैं भी तुम्हारी सुरक्षा ही कर रहा हूँ।” - कैप्टन विनोद के स्वर में कोमलता थी – “ आओ मेरे साथ इस सोफे पर बैठ जाओ। 

मैं तुम्हे एक कहानी सुनाता हूँ। कहानी खत्म होते ही मैं तुम्हे तुम्हारे कैम्प तक जीप से छोड़ आऊंगा।

वैसे भी तुम अपने साथियों से काफी आगे निकल आये हो। वहां तक तुम अब चलते हुए शायद पहुँच न पाओ।” कैप्टन विनोद के स्वर में जाने कैसी आश्वस्ति थी मैं जाकर उनके बगल में बैठ गया। 

कैप्टन विनोद ने कहना शुरू किया – “दुश्मनों ने धोखे से हमारे अस्पताल को अपना निशाना बनाया। दुश्मन देश के दो सैनिक हमारे सैनिक के वेश में एक हमारे ही घायल सैनिक को लेकर आये।

वह घायल था और और हमारे देश की सेना ने उसे बहुत ढूंढा लेकिन नहीं मिला था। शायद , साजिश के तहत उसे घायल होते ही घुसपैठियों ने कहीं छुपा दिया था। 

अचानक अपने खोये सैनिक को अपने हॉस्पिटल में पा सभी खुश हो गए और बिना अधिक पड़ताल किये हॉस्पिटल के गेस्ट रूम में घायल को लेकर आने वाले छद्म वेष धारियों को ठहरने की इजाजत दे दी गई।

अभी उस सैनिक का इलाज चल ही रहा था कि जोरों का ब्लास्ट हुआ और पूरा हॉस्पिटल एक पल में खंडहर में तब्दील हो गया।” 

“ लेकिन हॉस्पिटल तो अपनी शानदार स्थिति में खडा है। “ मेरी बातों को अनसुना कर कैप्टन विनोद ने अपनी बात जारी रखी – “ कोई नहीं बचा उस ब्लास्ट में।

दीवाल पर पड़े खून के छींटे भी उसी ब्लास्ट में मारे गए होपितल के कर्मचारियों के हैं।” 

“ हाँ , पर यह होस्पीटल तो मुझे खंडहर नहीं दिखता।” 

जवाब में कैप्टन विनोद के चेहरे पर रहस्य भरी मुस्कान फ़ैल गई और उनका चेरा अजीब से भावों से भर गया।

मैं उनके चेहरे को देखकर अन्दर से दहल गया। फिर भी , मैं ने हिम्मत कर पूछा – “ आप उस ब्लास्ट में बाख कैसे गए ?” 

सुनते ही कैप्टन विनोद ठहाका लगा कर हंस पड़े और मुझ पर एक भरपूर नजर डालते हुए कहा – “ यह कहानी आज से मात्र दस वर्ष पहले की है और मैं तो आज से पचास वर्ष पहले मर चुका हूँ।” 

इसके आगे उनहोंने क्या कहा – मुझे कुछ नहीं मालुम।, 

चेहरे पर गीलेपन का अहसास जब काफी हुआ तो मैं जैसे नींद से जागा। मुझे घेरे हुए मेरे सभी सहपाठी और टीचर खड़े थे।

मेरे आँख खोलते ही मेरे सर ने कहा – “ थैंक गॉड  तुम्हे होश आ गया।” 

“ तो क्या मैं बेहोश था ?” 

“ हाँ , तुन जंगल में जाने कहाँ भटक गए थे।

जब सभी लौट आये और तुम नहीं आये तो हम सभी मिलकर तुम्हें ढूँढने निकले। काफी दूर जाने के बाद हमने एक जीप आती दिखाई दी जिसमें एक आर्मी मैन तुम्हे पीछे की सीट पर सुलाए हुए हमारे कैम्प को ढूंढते हुए आ रहे थे।

उनहोंने हम सबको भी अपनी जीप पर बिठाया और कैम्प तक्ल छोड़ा। हमने उन्हें काफी रोकने की कोशिश की लेकिन वे यह कहते हुए चले गए अभी नहीं रुक सकता एक जरुरी काम है।” 

जब हमने तुम्हारे बेहोश जाने और उन तक तुम्हारे पहुँचने के बारे में पूछा तो बोले – “ सोमेश ही बताएगा और जो भी बताएगा वह सब अक्षरश: सच होगा। 

सबकी उत्सुक निगाहें अपनी ओर लगी देख मैं ने धीमे स्वर में पूछा, क्या उनका नाम कैप्टन विनोद था ?” 

सर ने “ हाँ “ में सर हिलाया। मैं ने सबको उधर चलने को कहा जिधर से सबने जीप आती देखी थी। पहले तो सर तैयार नहीं हुए लेकिन मेरे बहुत कहने पर वे राजी हो गए। सुबह होते ही हम उधर की ओर गए।

मैं उस जगह पर पहुँच कर गहरे आश्चर्य में डूब गया। वहां एक अधजला खंडहर था : जिसके एक टूटे पत्थर पर लिखा था “ आर्मी हॉस्पिटल “।


मुकेश तेरा क्या हुआ है - Hindi Horror Story

मुकेश और मैं एक ही कंपनी में काम किया करते थे। एक रोज हमें ट्रेनिंग पर भेज दिया गया। हमारी इससे पहले औपचारिक बातें ही हुआ करती थी।

पर ट्रेनिंग पर हमें एक दूसरे को जानने का मौका मिला। हमें कमरे में एक साथ ही रूकना था। साथ रहकर हम आपस में काफी घुल मिल गए थे। 

अक्सर रात को मुझ पर से चादर हट जाती तो मुकेश मुझे चादर ओढ़ा दिया करता था। मैंने उससे पूछा,’’क्यो जागते रहते हो रात भर।

 मेरी तो आदत है करवट बदल-बदल कर सोने की चादर तो टिकती ही नहीं‘‘। मुकेश ने मेरी बात का कोई जवाब नहीं दिया। अगले दिन वो कुछ शांत नजर आने लगा। 

रात को सोते समय मुकेश ने जो मुझे बताया वो न केवल दिलचस्प था बल्कि कुछ ऐसा था जो मैंने ना तो कभी सुना ना ही कभी महसूस किया। ऐसा कम ही देखने को मिलता है। बात केवल विश्वास की रह जाती है। 

मुकेश ने कहना शुरू किया। आप शायद यकीन ना करें 2003 का साल था। टीवी देखना, लाइब्रेरी जाना, दोस्तों से मिलना-जुलना मेरी दिनचर्या बनी हुई थी। 

ऐसे में एक दिन मैं अपने दोस्त से मिलने उसके घर गया हुआ था। पता चला मेरे छोटे भाई दिनेश की तबियत खराब है। मैं तुरंत घर को निकल पड़ा। वहॉँ देखा परिवार के सभी लोग मौजूद हैं। दिनेश जोरों से चींख रहा है, जैसे उसे किसी तरह का दर्द हो रहा हो। 

उसकी हालत बिल्कुल भी देखने लायक नहीं थी। तीन चार लोग भी मिलकर उसे संभाल नहीं पा रहे थे। पिताजी ने कहा इसे तुरंत डॉक्टर के पास ले चलते हैं। 

पर माँ ने मुझे चुप रहने का इशारा किया। दिनेश चींखता और बेहोश हो जाता। दिनेश की चीखें अब भयानक होने लगी थी। कोई उसका सर दबा रहा था कोई उसकी छाती मल रहा था। 

नानी ने कहा इसे पूजाघर में ले चलो। इतना सुनते ही दिनेश जोरों से चीखा। शायद ये बात उसे पसंद नहीं आयी। उसे घसीट कर पूजाघर में लाना पड़ा। यहॉँ वो और भी जोरों से चीखने लगा। उसे संभालना मुश्किल हो रहा था तो हमने उसे कुर्सी से बांध दिया। , 

फिर नानी ने उससे प्रश्न किया, ‘‘बता कौन है तू’’? 

सुनकर दिनेश गुस्से में भर गया। उसका सर और छाती अब भटटी की तरह तपने लगे। उसे अब संभालना मुश्किल हो रहा था। नानी ने फिर कहा, ’’बता कौन है तू‘‘? 

इस बार दिनेश ने गुस्से में अपने दांत पीस लिए। उन दांतों को किटकिटाने की आवाज मेरे कानों में दर्द करने लगी थी। उसके बदन की सारी हडिडयॉ कड़क रही थी। , 

आखिर में उसने अपनी जबान बाहर निकाली जो काली पड़ चुकी थी। यकीन नहीं हो रहा था किसी इंसान की जबान खिंच कर इतनी लंबी हो सकती है। 

नानी ने फिर अपनी बात को दोहराया ’’बता कौन है तू‘‘? कहॉ से आया है ? 

इस बच्चे ने तेरा क्या बिगाड़ा है? जहाँ से भी तुम आये हो वहीं लौट जाओ। बदले में जो कुछ भी मांगोगे हम तुम्हें देंगे। लेकिन इस बच्चे को छोड़ दो‘‘। 

दिनेश ने अपना आपा खो दिया। वो उसी तरह कराहता, दांत पीसता, चींखता चिल्लाता और बेहोश हो जाता। 

होश में आने पर उसे संभालना मुश्किल हो जाता था। मुझसे यह सब देखा नहीं गया। मैं बाहर आ गया और रोने लगा। 

उस वक्त मैंने हनुमानजी को याद किया। मंदिर में दिया भी जलाया। रोते-रोते भगवान से दिनेश के ठीक होने की प्रार्थना की। और वापस दिनेश के पास आ गया। दिनेश के रोने-चीखने से वहॉ अब जमघट लग चुका था। 

लोगो की भीड़ में भी दिनेश उसी तरह की हरकतें किये जा रहा था। उसके शांत होने पर मैंने उसे पानी पिलाया। पानी पीने के बाद वो और भी भयानक रूप में आ गया।

उसका चेहरा एक दम काला हो गया, आंँखे लाल सुर्ख हो गई। यह वो दिनेश नहीं था जिसे मैं पहचानता था। ऐसा लग रहा था जैसे उसकी आंँखे फट कर बाहर आ जायेगी।  

पास जाने पर वो हर किसी को काटने को दौड़ता। अपना मुँह नोचने लगता। और फिर वो शांत हो गया और रोने लगा। 

मैंने पूछा तुम कौन हो? क्यों हमें परेशान कर रहे हो? 

दिनेश ने मेरी तरफ ऐसे देखा जैसे मेरी जान ले लेगा। दिनेश कुछ देर तक मुझे घूरता रहा। वो दिनेश नहीं था उसकी जगह किसी और ने ले ली थी। 

सबको बारी बारी घूरने के बाद उसकी आँखें अपने कोटर में गोल गोल घूमने लगी। ऐसा नजारा जीवन में पहली बार ही देख रहा था। बल्कि मैं तो कहूंगा यह सब कुछ जीवन में पहली बार ही देख रहा था। 

वो चींखना चिल्लाना वो भयानक सी हँंसी, वो दांत पीसना किटकिटाना, दर्द में कराहना, हडिडयों का एक साथ कड़कना, सब कुछ एक मनहूसियत में बदल चुका था। 

फिर दिनेश ने एक लंबी सांस खींची और छोड़ी। उसकी सांस की दुर्गन्ध इतनी थी सब अपना मुंह ढ़क कर घर से बाहर निकल गए। 

और वो पागलों की तरह हंँसा। वापस अंदर जाने पर दिनेश फिर सभी को घूरने लगा। हमने वापस उससे पूछा, ’’कौन हो तुम‘‘? 

फिर वो एक औरत की आवाज में बोला, ‘‘मैं शाहडोल की हूॅ। मैं हूँ तंत्रा। इसने मुझे जगा दिया है। मैं इसे नहीं छोडूंगी। इसे अपने साथ लेकर जाउंगी’’। और हंसने लगी। 

हमने कहा जो तुम मांगोगी हम तुम्हें देंगें पर इसे छोड़ दो। वो दुष्ट आत्मा अब अपने पूरे रूप में आ गई और बोली, ‘‘मुझे एक मटकी, चार नारियल, चुनरी, सिंगार का पूरा सामान लाकर दो तो मैं चली जाउँगी। नहीं तो इसे अपने साथ ही लेकर जाउँगी। 

जल्दी करो। जल्दी करो दफा हो जाओ। ये सामान लेकर ही आना। वरना इसे तो मैं चबा जाउंगी’’ और हंसने लगी।

हम सबके चेहरे पीले पड़ गये। माँ और मैं तेजी से बाजार की तरफ निकले। रास्ते में मॉ रोने लगी तो मैंने उन्हें दिलासा दी ‘‘सब ठीक हो जाएगा’’ माँ 

माँ बोली कुछ भी ठीक नहीं होने वाला मुकेश। मैंने तुझे बताया नहीं। इसने जब अपना पहला असर दिखाया था। तब दिनेश को क्या हुआ हम समझ ही नहीं पाये थे।

दिनेश के साथियों ने हमें बताया। उस दिन दिनेश के ऑफिस में मीटिंग थी। सब आपस में हंस-बोल रहे थे। 

सब कुछ ठीक था कि अचानक दिनेश की तबियत बिगड़ने लगी। दिनेश ने सामने रखा गिलास उठाया और पानी पिया। पानी पीते ही दिनेश बेहोश हो गया। उसके साथी चौंक गये। दो लोगों ने मिलकर उसे टेबल पर लिटाया। उस समय उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे। 

वो अपनी साथियों से कुछ कहना चाह रहा था लेकिन उसके मुंह से एक शब्द भी नहीं निकल पा रहा था। उसके साथी उसे हॉस्पिटल ले गए। 

हमें जैसे ही सूचना मिली हम सभी वहॉ पहुंच गए। दिनेश कुछ देरलगत।


कनाडा के टनल का भयानक किससे - Hindi Horror Story

कनाडा के ओनटेरियो के नियाग्रा फॉल्स के पास स्थित इस टनल का नाम सुनते ही लोग कांपने लग जाते हैं।

इस टनल का निर्माण सन 1900 में ग्रांड रेलवे लाइंस के ठीक नीचे किया गया था और इस टनल को बनाने का उद्देश्य उस इलाके के पानी के बहाव को पास ही स्थित खेतों की सिंचाई के लिए प्रयोग किया जाना था।16 फीट ऊंची और 125 फीट लंबी इस टनल की कहानी किसी को भी हिला कर रख सकती है।

टनल का निर्माण हुए काफी वक्त बीत गया था और सब कुछ बहुत आराम से और ठीकठाक चल रहा था। लेकिन अचानक एक दिन यहां एक दर्दनाक हादसा हुआ जिसने सब कुछ बदल कर रख दिया।

इस टनल के आसपास आबादी बहुत कम थी इसीलिए हर समय यहां पानी भी नहीं बहा करता था। जब पानी बहुत भर जाता था तो उस समय इस टनल का प्रयोग किया जाता था. इस टनल में यूं तो कई हादसे हुए लेकिन एक हादसा ऐसा था जिससे ओनटेरियो शहर आज तक उबर नहीं पाया है|

एक बार की बात है जब इस टनल में पानी का बहाव नहीं था, इस टनल के पास एक घर में बाप और बेटी रहा करते थे| हवा का रुख बहुत तेज था और चारों ओर सिर्फ और सिर्फ अंधेरा था|

लड़की घर में अकेली थी और पीछे वाले कमरे में सो रही थी कि अचानक उस घर में आग लग गई और देखते ही देखते आग ने पूरे घर को अपनी चपेट में ले लिया| 

लड़की ने घर से बाहर निकलने की कोशिश की लेकिन तब तक उसके कपड़ों को आग ने पकड़ लिया| खुद को बचाने के लिए वह टनल की तरफ भागी लेकिन टनल में भी उस समय पानी नहीं था. 

आग की जलन की वजह से वह चीखती चिलाती रही, उसकी चीख बहुत भयानक और दर्दनाक थी जिसे सुनकर कई लोग वहां इकट्ठा हो गए लेकिन किसी ने उस लड़की को नहीं बचाया और आखिरकार उस लड़की ने यहां दम तोड़ दिया|

इसके अलावा यहां एक और लड़की की ऐसे ही जलने के कारण मौत हुई थी| लोगों का कहना है कि इस टनल में कुछ दरिंदों ने एक लड़की का सामूहिक बलात्कार किया और अपने जुर्म को छिपाने के लिए उस लड़की को जिन्दा जला दिया|उसकी चीखें आसपास के इलाकों तक सुनाई दीं|

सुबह जब लोग उस टनल में पहुंचे तो लड़की का अधजला हुआ शरीर वहां पड़ा था और तब से लेकर आज तक वहां शरीर के जलने की वैसी ही बदबू आती है जैसी पहले आती थी|

रोशनी को देखकर परेशान करती हैं रूहें स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर कोई उस स्थान पर रोशनी करता है तो उन लड़कियों की रूहें उसे परेशान करती हैं|

कहते हैं एक सफाई कर्मचारी जब टनल की सफाई के लिए अंदर गया तो जैसे ही उसने माचिस जलाई तभी एक भयानक चीख उस टनल में गूंजने लगी और उस कर्मचारी ने अपने सिर के ठीक ऊपर दीवार पर एक छिपकली की तरह कुछ रेंगते देखा| 

उसका चेहरा जला हुआ था| इस घटना के बाद वह आदमी तो बच गया लेकिन उसका मानसिक संतुलन बिगड़ गया| 


गाउ का उस भयानक रात - Hindi Horror Story

कहने को तो हम 2010, एक आधुनिक युग में जी रहें हैं| जहाँ सिर्फ विज्ञान की बात होती है! यहाँ भूत प्रेत की बात करना अन्धविश्वास कहलाता है| 

मैं भी ऐसा ही सोचता था मगर एक हादसे के बाद मेरी सोच थोड़ी बदल गई|जून की गर्मी के कारण सबका जीना मुहाल था|

हम सब कुछ दिनों के लिये अपने ननिहाल गए हुए थे|वहां जहाँ मेरी कुछ अच्छी यादें जुडी हुई थी|मगर इस बार ऐसा नहीं था| मैंने जो देखा उस पर मुझे विश्वास नहीं हुआ|

गाँव में एक कटे सर के आदमी के दिखने की अफवाह थी| पर हम इन बातों पर विश्वास नहीं करते थे| एक दिन दोपहर को मैं नेहर के किनारे बैठा था| गर्मी में ठंडी हवा के झोंकों का अलग ही मजा था| मुझे हलकी हलकी नींद आने लगी थी|

तभी कोई मेरे पास आकर बैठ गया और बाते करने लगा| मैं भी आधी नींद में उससे बाते करने लगा| बातों बातों में उसने मेरा अतीत बता डाला और फिर जब मैने उसे देखा तो मेरी सांस ही रुक गई| उसका सर नहीं था

एक पल में मेरी सारी नींद उड़ गई और वो आदमी भी गायब हो गया| मैं वहां से भाग कर सीधा घर आ गया| उस दिन मेरी तबियत भी ख़राब हो गई|

जो मैंने देखा शायद वो मेरा सपना भी हो सकता है क्यूंकि मैं आधी नींद में था| मगर जब भी वो घटना याद आती है मेरी रूह कांप जाती है|


नाचती औरतों - Hindi Horror Story

मेरे चाचा अपने समय में काफी आवारा हुआ करते थे| दिन भर दोस्तों के साथ घुमते रहते थे और रात बारह – एक बजे से पहले वह कभी घर नहीं आते थे| 

घर वाले उनसे काफी परेशान रहते थे| मगर उनपर समझाने का कोई कोई असर नहीं पड़ता था|

एक रात वह अपने दोस्त के साथ नदी किनारे घूम रहे थे! वहां एक अघोरी बाबा रहते थे| चाचा और उनके दोस्त उन्हें छेड़ने के मकसद से उनके पास बैठ गए| 

उन्होने पहले तो उनके साथ बैठ के शराब पी फिर इधर उधर की बातें कर के उन्हें परेशान करने लगे| बातों बातों में भूत का विषय छिड गया| चाचा ने बाबा से भूत दिखने को कहा|

पहले तो बाबा टालते रहे मगर चाचा अडे रहे तो बाबा राजी हो गए| उन्होंने उनके चारों तरफ एक गोला बनाया और कहा चाहे जो भी हो बाहर मत जाना|

बाबा ने मन्त्र जपना शुरू किया|चाचा और उनके दोस्त उस समय मंद मंद मुस्कुरा रहे थे क्यूंकि उनको ये मजाक लग रहा था| 

अचानक छम छम की आवाज़ आई और एक औरत वहां आकर नाचने लगी|उसके बाद अचानक दो और औरतें वहां आ गयी और वह भी नाचने लगी|ये देख चाचा और उनके दोस्त की सिट्टी पिट्टी गोल हो गई|

दोनों का नशा एक पल में गायब हो गया! वह दोनों डर के मारे वहां से भागने लगे|मगर नाचती औरतों ने अपना नाच छोड़ उनको घेर लिया और उनके चारों ओर घूमने लगी|

वह उनकी तरफ बहुत ही भयानक तरह से देख रही थी, जैसे वह उन्हें वहां बुलाये जाने से नाराज हो|वह दोनों वहीँ पर बेहोश हो गये| सुबह जब होश आया तो वहां सिर्फ अघोरी बाबा ही थे|उन्होंने औरतों के बारे में पूछा तो बाबा ने बताया कि उन्होंने उन्हें भगा दिया|

दोनों ने बाबा के पैर छुये ओर वहां से भाग गये|उस दिन के बाद चाचा ने रात को देर से आना बंद कर दिया|


एक भुतिया डायन की कहानी - Hindi Horror Story

यह कहानी एक डायन की है| काली डायन इस कहानी का नाम हे दोस्तों मैंने यह कहानी बनाकर नहीं लिखी यह कहानी एक सचमुच की घटना है जो की मैंने अपनी दादी से सूनी है और बहुत पुरानी है कुछ लोगों का मानना है की भूतों का कोई अस्तित्व नहीं होता है|

आप लोग जानते हैं भगवान् का अस्तित्व होता है है| तो भूतों का क्योँ नहीं सभी ने रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथों मैं पढ़ा या किसी से सुना होगा की भगवान् जब इस धरती पर थे तब भी भूत पिशाच हुआ करते थे भगवान् निराकार है|

निराकार का अर्थ होता है जिसका कोई आकर नहीं होता जो लोग जिस रूप मैं भगवान् को पूजते हैं भगवान् उसी रूप मैं उसे दिखाई देते हैं|तो प्रेम से बोलिए भक्त और भगवन की जय और समय ब्यर्थ न करते हुए मैं आपको अपनी कहानी की और ले चलता हूँ बहुत पुरानी बात है तब पानी के ज्यादा शाधन नहीं हुआ करते लोग कुए बाबड़ी तालाब आदि से पानी पिया करते थे|

तो यह कहानी भी एक तालाब की है| जो कि उस काली डायन के जादू से अमृत से ज़हर बन गया था! यह डायन कैसे बनी कैसे इस तालाब का पानी विष बन गया मैं यह कहानी आपको बताता हूँ|

एक गाँव मैं एक औरत के कोई बच्चा नहीं था! वह औरत गांव के मुखिया कीपत्नी थी उसके शादी को काफी समय हो गया था! सब लोग उसे बाँझ कहा करते थे|

सारे गाँव वाले उसका मुंहभी नहीं देखना कहते थे कहते थे कि इसका मुंह देख लिया तो पूरा दिन बेकार चला जायेगा पर मुखिया कि पत्नी थी इसलिए लोग थोड़ी बहुत बात चीत कर लिया करते थे|

एक दिन गांव मैं एक फकीरा बाबा भिक्षा मांगते हुए आ पहुँचता है तो वह बतों ही बातों मैं उसका हाथ देखनेलग जाता है| और कहता है आपको बच्चानहीं है ना वह बोली आपको कैसे पता चला वह बोला हम हस्त रेखा मैं निपुण है और हाथ देखकर यह बता सकते हैं कि क्या होने वाला है क्या होगा वह बोली अच्छा तो यह बताओ कि मेरे बच्चा कब होगा तो उसने कहा आपको भगवान् ने बच्चा तोनहीं दिया पर मैं एक रास्ता बताताहूँ!वह सुनो अमावस्या की रात को किसी एक ऐसे लड़के कि बलि पीपल के पेड़ के नीचे दो|

जो अपने माँ बापके एकलोता पुत्र हो औरउसके खून से अपने बाल धोना फिर कहना ए प्यासी आत्माओ यह बलि मेरी तरफ सेस्वीकार करो और मुझे एक पुत्र दे दो|

एक लोटे मैं उस कुए का पानी भर कर उस मैं उसके सरीर की दो बून मिला कर खुद पी लेना और उस लड़के के सिर के बाल अपनी साडी की गांठ मैं बंधे रखना तो युम्हे अवस्य एकपुत्र पैदा होगा इतना कहकर वह वहां से भिक्षा लेकर चला गया|

उस दिन के ठीक तीन दिन बाद अमावश्या थी उस औरत ने वही किया जो उस बाबा ने बताया था उसने अपने देवरानी केलड़के कि बलि दे दी और खून की दो बूंदे पानी मैं मिलाकर खुद पी लिया और उस सिर के कुछ बाल को काटकर अपनी गांठ मैं बांध लिया औरबिना पीछे मुड़े अपने घर आ गयी|

सुबह गांव बालों को पता चला कि मुखिए के भाई के बेटे को किसी ने मार के वहां फेक रखा है जब यह बात मुखिए और उसके भाई ने सूनी तो वह नंगे पैर दौड़ पड़े धीरे धीरे सारा गांव इकठ्ठा हो गया उस लड़के की माँ का रो रो बुराहो गया था|

तब किसी व्यक्ति ने हिम्मत जुटाकर उस सिर को धड से जोड़ा और उसे नदी मैं बहाने की सलाह दी वेसा ही किया लोगो ने उस लाश को पानी मैं बहा दिया!सब लोग यही कह रहे थे किसने किया यह सब कैसे हुआ सब लोगों केलिए यह घटना चिंता का विषय बन गयी थी| 

जब मुखिया घर पहुंचा तो क्या देखता है की उसकी पत्नी तो पकवान बना रही थी वह बड़ी खुश नज़र आ रही थी मुखिया ने क्रोध मैं कहा क्या तुम्हे इस बात का बिलकुल भी दुःख नहीं है की हमारे भाई का बेटा मर गया है|

वह पहले ऐसी नज़रों से देखी जैसे की उसे मार ही डालेगी फिर कहने लगी लड़का उसका मरा है मेरा नहीं मैं क्योँ शोक मनाऊँ औरहसने लगी और कहने लगी तुम पागल हो तुम्हे तो खुस होना चैये की अब तुम्हारे भी एक पुत्र आने वाला है, और यह जान कर और ख़ुशी होगी की वह इस जायदात का अकेला वारिस होगा हां हां हां वह फिर ऐसे हसी यह देखकर मुखिया से रहा नहीं गया और उसे जान से मारने के लिए तलवार उठाने चला गया वह अन्दर तलवार ढून्ढ रहा था पर तलवार नहीं मिली|

जब वह पत्नी के बेद के पास पहुंचा तो क्या देखता है की सारे कपडे खून से लथपत हैं और तलवार भी वही पडी है और उस पर खून लगा है वह यह सब देखते ही समझ गया की यह सब इसने पुत्र प्राप्ति केलिए बलि दी है उसने उसे मारने का विचार बनाया की अभी मैं इसको मार दूंगा तो सब लोग मुझे गलत समझेंगे|

और वह वहां से चला गया उस दिन से गाँव मैं ऐसी ऐसी घटना होने लगी किसी की भैंस मर गयी किसी ने उसे मार डाला और उस के सरीर के अंग इधर-उधरफैले पड़ेजैसे की किसी ने उसे नोचनोच कर खाया हो तो किसी दिन किसी का कुत्ता किसी का बछडा तो किसी की बकरी मर गयी और उसी तरीके से वह मर रही थी जिस तरीके भैंस को किसीने मारा था ऐसी घटना से सारा गांव परेशान था किसी को यह समझ नहीं आ रहा था की आखिर हो क्या रहा है|

एकदिन की बात है मुखिया रात को अपने गेट के पास सोया हुआ था आधी रात केसमय उसे गेट खुलने की आवाज आई वह जाग गया उसने देखा की एक औरत बाल फिकरे हुए आधी रात को बहार चली जा रही है देखने मैं तो ऐसा लग रहा थाकी जैसे उसको कोई खींच कर ले जा रहा हो|

भादों(अगस्त) की काली रात थी चरों तरफ से आवाजें आ रही थी कही शियार तो कहीं कुत्ते भोकते ऐसा लग रहा था उसे की जैसे यह रात जाने क्या क़यामत लायेगी|

अचानक उसे एक गाय के बछड़े के रंभाने की आवाज आई वह समझ गया हो न हो यही सारे गांव की बर्बादी का कारन हैं| मुखिया के दिमाग मैं एक आइडिया आया की क्योँ न मैं चलकर देखूं की यह कहाँ जाती है| वह उठकरचल दिया उसने आगे चल के क्या देखा कि पड़ोसी के गाय का बछड़ा का कटा हुआ मुंड पडा है और उसके धड को वो खा गए थे......  इस का और भी भाग आगे आएगा|


ला मासिया एंकांटडा होटल - Hindi Horror Story

बहुत से ऐसे लोग हैं जो मरने के बाद इस दुनिया को छोड़कर नहीं जाना चाहते| उनकी कोई ना कोई गुप्त इच्छा ऐसी होती है जो उन्हें जीवित लोगों से दूर होने ही नहीं देती, इसीलिए शरीर त्यागने के बाद भी वह किसी ना किसी रूप में वापस इस दुनिया में आ ही जाते हैं|

लेकिन जिस स्थान का जिक्र हम यहां करने वाले हैं वहां भूत-प्रेत और पिशाच तो हैं लेकिन उनमें से कोई भी मृत नहीं बल्कि आपकी और हमारी तरह जीवित हैं| अब आप सोच रहे होंगे कि ऐसा कैसे हो सकता है कि भूत भी हैं और मृत भी नहीं हैं?

इससे पहले कि आप और ज्यादा खौफनाक तथ्यों और धारणाओं को आधार बनाकर सहमने लगें हम आपको बता दें कि हम यहां बात कर रहे हैं ला मासिया एंकांटडा होटल की, जिसका इंटीरियर कुछ ऐसा किया गया है जिसे देखकर आप थर-थर कांपने लगें| आप सहम जाएंगे कि शायद आपकी थाली में खाना परोसने वाला वाकई कोई पिशाच है|

असल में इस होटल का कॉंसेप्ट इतिहास से ताल्लुक रखता है| कहते हैं 17वीं शताब्दी में जोसफ मा रिएस ने मासिया और सुरोका ने मासिया सेंटा रोजा बनवाया था|

लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया इस संपत्ति पर विवाद भी गहराता गया| गहराते विवाद के बाद सुरोका और रिएस ने सिक्का उछाल कर अपनी किस्मत तय करने की सोची जिसमें रिएस सारी संपत्ति हार गया| रिएस के परिवार वालों ने अपना घर छोड़ दिया और एक नई संपत्ति खड़ी की|

रिएस ने अलग संपत्ति बना ली और जिस संपत्ति पर विवाद गहराया था वह देखते ही देखते खंडहर में बदल गई| लगभग 2 सदियों तक यह इमारत खंडहर बनी रही| इस इमारत पर सुरोका के वंशजों ने एक होटल बनाया, जिसका निर्माण 1970 में जाकर पूरा हुआ| 

लेकिन सुरोका का परिवार यह भी मानता था कि इस होटल में किसी का श्राप लगा हुआ है इसीलिए इसे हॉंटेड बनाया जाना चाहिए| तब से लेकर अब तक यह होटल हॉंटेड होटल की तरह चल रहा है| इस होटल की सजावट बहुत ही खौफनाक तरीके से की गई है जिसे देखकर अच्छे-अच्छे लोग सहम जाएं|

जब आप इस होटल में जाएंगे तो आपका स्वागत खूब से सने चाकू और तलवार से किया जाता है| ऐसा नहीं है कि आप कभी भी इस होटल में खाना खाने आ सकते हैं, इस होटल में खाने का समय निर्धारित और लगभग तीन घंटे तक चलने वाला है|

इस होटल में खाने के दौरान एक शो चलता है जिसे देखकर किसी के भी पसीने छूट जाएं| आपको खाना खिलाने के लिए जिन लोगों को तैनात किया गया है वह सभी इतने खौफनाक अंदाज में आपके सामने आएंगे कि आप खाना छोड़ अपनी कुर्सी पर खड़े हो जाएंगे|

यह शो इतना खतरनाक है कि इसमें 14 वर्ष के नीचे के बच्चे और साथ ही दिल के मरीज और गर्भवती महिलाओं का प्रवेश पूरी तरह वर्जित है|

आप जैसे ही इस होटल में प्रवेश करेंगे वैसे ही यह खौफनाक मंजर शुरू हो जाता है| अगर यह सब पढ़ने के बाद आप इस होटल में जाने की सोच रहे हैं तो यह रिस्क आपका अपना होगा|


नेपाल के बो डरावनी इलाका - Hindi Horror Story


विनय एक बीमा कंपनी में काम करते है|उनकी कंपनी उनको एक जगह से दूसरे जगह ग्राहक से मिलने के लिए भेजती रहती है जिसके कारण वो अपना घर एक ठिकाने पर नहीं रख सकते थे|

इस बार उन को नेपाल के छोटे से पहाड़ी इलाके में जाना था करीब 1 महीनो के लिए। इसलिए इस बार उन्होंने अपनी पत्नी को भी साथ ले लिया।

परिवार में सिर्फ वो और उनकी पत्नी ही रहती थी। विनय और उसकी पत्नी दोनों नेपाल के लिए निकल पड़े वैसे भी ठण्ड का मौसम था और नेपाल में ऊपर से बहुत तेज़ बर्फ पड़ रही थी।

वो लोग अपने घर पहुँच चुके थे। अपने घर तक पहुँचने के लिए उनको बहुत संघर्ष करना पड़ा क्योंकि घर छोटे से गाँव में एक पहाड़ी इलाके में था। जिसकी वजह से दोनों बहुत थक चुके थे।

रात के 12:30 बज चुके थे। जहाँ वो रह रहे थे वहाँ दूसरे घर एक दुसरो से बहुत दूर दूर थे।

बाहर ज़ोरो से ठंडी हवा और बर्फ गिर रही थी। दोनों अपने रजाई में दुबक कर आराम ही कर रहे थे की अचानक उनको लगा की किसी ने उनके घर का दरवाज़ा खटखटाया है।

फिर उन्होंने सोचा की क्या पता तेज़ हवा चलने की वजह से ऐसा जो रहा हो इसी लिए उन्होंने उसको अंदेखा कर दिया। 

अगली सुबह विनय जिस काम के लिए आया था उसके लिए वो निकल पड़ा उसकी पत्नी घर में अकेले ही थी।

उसको समझ नहीं आ रहा था कि वो घर में बैठे वक़्त कैसे बिताए उसने सोचा की चलो क्यों न बाहर जा कर ही कुछ देख लिया जाए।

बाहर ठण्ड तो थी पर हवा नहीं चल रही थी। इसी लिए उसने अपना स्वेटर पहना और बाहर निकलने को तैयार हो गयी जैसे ही उसने अपना घर का गेट खोला वैसे ही देखती है कि घर के पास बने एक खम्बे के पीछे एक छोटा सा बच्चा खड़ा है।

जो उसको चुपके चुपके देख रहा है। विनय की पत्नी ने उसको अपनी और बुलाया पर वो नहीं आया और वो वहाँ से भाग गया।

अगले दिन भी कुछ ऐसा ही हुआ वो लड़का उसको फिर से घूरे देखा जा रहा था इस बार उसकी पत्नी ने उस बच्चे को पकड़ लिया और पूछा की तुम यहाँ क्या कर रहे हो।

उस बच्चे ने कुछ नहीं बोला और न ही कुछ बताया। विनय की पत्नी ने उससे उसके घर के बारे में पूछा तब भी वो कुछ नहीं बोल रहा था।

आखिर में उसका नाम पूछने पर उसने अपने धीमी सी आवाज़ में अपना नाम सूर्य बताया और फिर वहाँ से भाग गया।

उसको उसका व्यवहार कुछ समझ नहीं आया। ये सिलसिला ऐसे ही चलता रहा वो बच्चा रोज़ उसको खम्बे के पीछे से निहारता रहता था।

उस दिन रविवार की रात थी दोनों घर में अँगीठी के सामने आग ताप रहे थे क्योंकि बाहर की हालत बहुत ख़राब थी इतनी ख़राब की कोई थोड़ी देर के लिए बाहर निकल जाए तो उसकी जान चली जाए।

अचानक दरवाज़ा किसी ने खटखटाया उन दोनों को फिर से लगा की शायद हवा की वजह से ऐसा हो रहा हो।

तभी फिर से किसी ने दरवाजा खटखटाया। इस बार खटखटाने की आवाज़ साफ़ आरही थी। ,

ये आवाज़ सुन कर दोनों डर गए क्योंकि इतनी रात को वो भी जान ले लेने वाली ठण्ड में आखिर कोन हो सकता है।

दोनों केवल एक दूसरे का मुह देख रहे थे। अचानक दरवाज़े के बाहर से धीरे धीरे रोने की आवाज़ आने लगी। तभी विनय ने जोर से आवाज़ में बोला, कौन है बहार

कुछ देर तक आवाज़ तो नहीं आई पर बाद में एक धीमी सी आवाज़ आई, दरवाज़ा खोलो, कृपया करके दरवाज़ा खोलो, बहुत ठण्ड है।

ये आवाज़ किसी छोटे से बच्चे की थी। तभी विनय की पत्नी को ये आवाज़ जानी पहचानी लगी उसने कहाँ कि ये तो वही बच्चे की आवाज़ लगती है जो रोज़ घर के बाहर खड़ा रहता था।

विनय की पत्नी ने कहा कि हमें उसे अंदर लाना चाहिये। वो भागते हुए अभी दरवाज़े के पास जा ही रही थी की अचानक उनके घर के फ़ोन की घंटी बाजी। 

फोन एक पड़ोस में रहने वाली औरत का था जिससे आज ही विनय की पत्नी मिल कर आई थी।

विनय की पत्नी ने फ़ोन उठाया। वहाँ से उस औरत की आवाज़ आई \हेल्लो, जी मै आपको बताना भूल गई थी की अगर आपके घर के बाहर कोई भी दरवाज़ा खटखटाए तो उसको मत खोलना।

विनय की पत्नी ने कहा की, अभी मेरे घर जे बाहर एक बच्चे की आवाज़ आरही है जो दरवाज़ा खोलने को कह रहा है|

तभी उस औरत ने कहा कि, नहीं आप बिलकुल मत खोलना, वो असल में एक आत्मा है। यहाँ जब जब तेज़ आंधी और ठण्ड पड़ती है वो तब तब सबके घर के बहार जाता है और दरवाज़ा खोलने को कहता है।

वो ठण्ड का बहाना बनाता है और दरवाज़ा खुलवाने की कोशिश करता है । अगर कोई गलती से भी दरवाज़ा खोल देता है तो वो अगले दिन बर्फ में दबा हुआ मिलता है।

ये सुनते ही जैसे उनके पैरों से ज़मीन ही खिसक गयी। वो सोचने लगी की जो बाहर दरवाज़ा खटखटा रहा है वो असल में एक आत्मा है।

उन्होंने ने दरवाज़ा नहीं खोला अगले दिन ही वो दोनों भाग कर पडोसी के पास गए और पूरे मामले के बारे में पूछा।

उस औरत ने बताया कि इस गाँव में एक परिवार रहता था पहाड़ टूटने की वजह से उस परिवार का विनाश हो गया बस एक बच्चा बच गया।

वो दुसरो के घर जा जा कर खाना मांगता। एक दिन बहुत ज़ोरो से बर्फ की आंधी पड़ रही थी।

वो दुसरो के घर के बाहर दरवाज़ा खटखटा कर घर के अंदर आने को गुहार लगा रहा था।

पर किसी ने भी उसकी गुहार नहीं सुनी ठण्ड की वजह से सब अपने घरों में दुबके हुए थे। कल सुबह होने पर उस बच्चे की लाश बर्फ में अकड़ी हुई मिली।

आज भी कभी भी ज़ोरो से बर्फ की आंधी आती है तो उसकी आत्मा सबके घर के पास आती है और गुहार लगाती है। ये सब सुन कर दोनों हैरान रह गए।

लेकिन वो वहाँ 1 महीने जब तक रहे तब तक 3-4 बार उनके साथ ऐसा ही हुआ। लेकिन विनय का काम खत्म हो जाने पर वो वहाँ से चले गए।

पर विनय की पत्नी में दिमाग में एक रहस्य हमेशा बना रहा की उस घटना के बाद जो बच्चा उसे रोज़ घर के बाहर दिखता था वो कभी नहीं दिखा।

खड़ खड़--खड़ खड़..ट्रेन द्रुत गति से भागी चली जा रही थी। संध्या काल का समय था, तेज बारिश और बीच बीच मे बिजली की चमक वातानुकूलित कोच की खिड़कियों से अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही थी।

केबिन का एकांत और यह भयावह मौसम मुझ जैसे डरपोक आदमी को और डरा रहा था। थोड़ी देर बाद गाड़ी के पहियों की रफ़्तार कम हुई और एक मध्यम से स्टेशन पर गाड़ी रुकी।बारिश इतनी ज्यादा थी

कि मैं स्टेशन का नाम नहीं पढ़ पा रहा था।मैं अपने केबिन मे अकेला था और इस उधेड़बुन मे था की कोई सह यात्री आये, जिससे वार्तालाप करते करते आगे का रास्ता आसानी से काटा जा सके और एक अंदरुनी भय जो मेरे अंदर जागृत हो चुका है

उससे मुझे निजात मिल सके। तभी किसी ने केबिन का दरवाजा खटखटाया और एक शांत सा दिखने वाला व्यक्ति केबिन मे दाखिल हुआ।

अपना सामान आदि व्यवस्थित करने के बाद वो मेरी तरफ देख कर मुस्कराया और मेरी तरफ हाथ आगे बढ़कर उसने अपना परिचय दिया..

मैं मिस्टर घोष...। वो बोला -मैं कोलकाता जा रहा हूँ..पुनर्जन्म से सम्बंधित एक कार्यशाला मे भाग लेने के लिए।

मैंने उसे बताया कि मैं कानपुर मे व्याख्याता के पद पर हूँ और पटना जा रहा हूँ। उसने कुछ खाने का सामान निकाला और मुझसे भी खाने हेतु आग्रह किया।किन्तु मैं बहुत ही सशंकित व्यक्तित्व का प्राणी..

ट्रेन मे किसी अजनबी के द्वारा दिए गए खाने को लेना असंभव था मेरे लिए।मैंने बहुत विनम्रता से उसके आग्रह को ठुकराया।

वो भी कम उस्ताद नहीं था ...कस कर हँसा और बोला- संशय कर रहे हैं मेरे ऊपर,अभी तो कुछ नहीं देखिये आगे क्या क्या होता है।

उसके यह शब्द सुन कर मुझे सांप सूंघ गया किन्तु मैंने किसी तरह अपनी घबराहट को छिपाया। कोई स्टेशन आने पर वो उतरता और ट्रेन चलने के बाद किसी दूसरे कम्पार्टमेंट से चढ़ कर फिर आ जाता।

पूछने पर बोलता की बीच बीच मे रेलवे की नौकरी भी कर लेता हूँ। थोड़ी देर बाद मैं और वह विभिन्न विषयों पर चर्चा करने लगे।

उसने पुनर्जन्म से सम्बंधित बातें प्रारम्भ कीं और पुनर्जन्म को अन्धविश्वास बताया। थोड़ी देर बाद उसने मुझसे पूछा की क्या आप भूत-प्रेत पर विश्वास करते हैं?

मैंने कहा-बिल्कुल।वो जोर से हँसा और बोला यह सब बकवास है। मुझे भूतों पर विश्वास था किन्तु वो भूतों के अस्तित्व को नकारता रहा।

रात अपने यौवन पर पहुँच चुकी थी,चर्चा उपरांत मैं वातानुकूलित प्रथम श्रेणी के कक्ष मे सोने का प्रयास कर रहा था।

अचानक मुझे ऐसा अनुभव हुआ की कोई मेरे गले पर गर्म अंगार रख रहा है।

मैं हड़बड़ा कर उठा ...कहीं कोई नहीं...मेरे अलावा उस कक्ष मे मेरा वही सह यात्री था जो सामने की बर्थ पर लेटा घोड़े बेंचकर सो रहा था।

मैं फिर सोने का प्रयास करने लगा।अभी आँख लगी ही थी की मुझे अपने पेट पर बहुत तेज दबाव और हंसने की तेज आवाज सुनाई दी।

मैं घबराकर उठा तो देखा की सहयात्री बर्थ पर नहीं था।लगभग एक दो मिनट बाद वो आया और बोला जनाब सोये नहीं...

मैंने अपनी घबराहट रोकते हुए उससे कहा अभी नींद नहीं आ रही और मैंने अपने बैग से एक मैग्जीन निकाली और पढ़ने का नाटक करने लगा।

सहयात्री भी बर्थ पर लेट गया और कुछ देर मे उसके खर्राटे केबिन मे गूंजने लगे।मैं भी थोडा निश्चिन्त हुआ और बर्थ पर आँख बंद कर लेट गया।

ट्रेन कभी धीमी होती कभी रफ़्तार पकड़ लेती लेकिन मेरे दिल ने अब तेज रफ़्तार ही पकड़ रखी थी...,

भय और घबराहट के कारण लघुशंका की इच्छा अपने आप जीवित हो जाती है..और मैं टॉयलेट की तरफ मुड़ा|

जैसे ही मैंने टॉयलेट का दरवाजा खोला वो सहयात्री मुझे अंदर दिखा और मैं चिल्लाते हुए अपनी बर्थ की तरफ भागा... ,

देखा तो वो सहयात्री इत्मिनान से अपनी बर्थ पर सो रहा है...मैंने घबराहट मे उसे जगाया...वो बोला..अरे क्या हुआ ? इतना मासूम लग रहा था ,

वो जैसे कुछ जानता ही ना हो....मैंने कहा- आप यहाँ भी और वहां टॉयलेट मे भी....वो कुटिलता से हँसा और बोला -मैं कितने रूप मे कहीं पर भी रह सकता हूँ।

घबराहट के मारे मैं पसीने से तर बतर..बिल्कुल निर्जीव सा खड़ा उसके सामने।वो बोला -तुम्हें भूतों पर विश्वास था ना..

तुम्हे तुम्हारे विश्वास का प्रमाण देना था।तुम्हारे जैसे लोगों के कारण ही हम भूत-पिशाच लोगों का अस्तित्व है...

इतना कहकर वो मेरी आँखों के सामने से अचानक गायब हो गया।मैं डर के मारे अवाक् और निर्जीव सा अपनी बर्थ पर बैठा था।

तभी केबिन के अंदर टिकट निरीक्षक आया उसका चेहरा देखकर मुझे बेहोशी छाने लगी क्योंकि यह वही सहयात्री था मेरा..और वो टिकट चेक कर मुस्कराता हुआ चला गया...


सर्दियों का बो रात - Hindi Horror Story

कुफरी में स्कीइंग का लुफ्त उठाने और पूरा दिन मौज मस्ती करने के पश्चात कुमार, कामना, प्रशान्त और पायल शाम को शिमला की ओर बीएमडब्लू में जा रहे थे।

सर्दियों के दिन, जनवरी का महीना, शाम के छ: बजे ही गहरी रात हो गई थी।

गोल घुमावदार रास्तों में अंधकार को चीरती, पेडों के झुरमुठ के बीच कार चलती जा रही थी।

सैलानी ही इस समय सडकों पर कार चलाते नजर आ रहे थे। टूरिस्ट टैक्सियां भी वापिस शिमला जा रही थी।

कुफरी की ओर इक्का दुक्का कारें ही जा रही थी। बातों के बीच चारों शिमला की ओर बढ रहे थे। लगभग आधा सफर कट गया था|

कार स्टीरियो की तेज आवाज में हंसी ठिठोली करते हुए सफर का आनन्द उठाते हुए समय का पता नही चल रहा था।

झटके मारते हुए कार क्यों चला रहे हो?” प्रशान्त ने झटकती हुई कार में झूलते हुए कुमार से पूछा।

“प्रशान्त भाई, मैं तो कार ठीक चला रहा हूं, मालूम नही, यह अचानक से झटके क्यों खा रही है?” कुमार ने झटके खाती कार को संभालते हुए कहा।

“कार को थोडा साईड करके देख लेते हैं। “हो सकता है, कि डीजल में कचरा आ गया हो, थोडी रेस दे कर देखता हूं, कि कार रिदम में आ जाए।

“ कुमार ने क्लच दबाते हुए कार का ऐक्सीलेटर दबाया, लेकिन कोई खास कामयाबी नही मिली, कार झटके खाती हुई रूक गई।

“अब क्या करे?” चारों के मुख से एक साथ निकला। सभी सोचने लगे, कि काली रात के साए में कुछ भी नजर नही आ रहा था, सोने पे सुहागा तो धुन्ध ने कर दी थी। धीरे धीरे धुन्ध बढ रही थी। ठंडक भी धीमे धीमे बढ रही थी। कार सडक की एक साईड पर खडी थी।

इक्का दुक्का कार, टैक्सी आ जा रही थी। “प्रशान्त बाहर निकल कर मदद मांगनी पडेगी। कार में बैठे रहने से कुछ नही होगा।

कार तो हम चारों का चलाना आता है, लेकिन कार के मैकेनिक गिरी में चारों फेल है। शायद कोई कार या टैक्सी से कोई मदद मिल जाए।

“ कह कर कुमार कार से बाहर निकला। एक ठंडे हवा के तेज झोके ने स्वागत किया। शरीर में झुरझरी सी फैल गई।

प्रशान्त भी कार से बाहर निकला। पायल और कामना कार के अंदर बैठे रहे। ठंड बहुत अधिक थी, दिल्ली निवासियों कुमार और प्रशान्त की झुरझरी निकल रही थी। दोनों की हालात दयनीय होने लगी।

“थोडी देर खडे रहे तो हमारी कुल्फी बन जाएगी।“ कुमार ने प्रशान्त से कहा।

“ठीक कह रहे हो, लेकिन कर भी क्या सकते है।“ प्रशान्त ने जैकेट की टोपी को ठीक करते हुए कहा।

“लिफ्ट मांग कर शिमला चलते है, कार को यहीं छोडते है। सुबह शिमला से मैकेनिक ले आएगें।“ कुमार ने सलाह दी।

“ठीक कहते हो।“ रात का समय था। गाडियों की आवाजाही नगण्य थी। काफी देर बाद एक कार आई।

उनको कार के बारे में कुछ नही मालूम था, वैसे भी कार में पांच सवारियां थी। कोई मदद नही मिली।

दो तीन कारे और आई, लेकिन सभी में पूरी सवारियां थी, कोई लिफ्ट न दे सका। एक टैक्सी रूकी।

ड्राईवर ने कहा, जनाब मारूती, होंडा, टोएटा की कार होती तो देख लेता, यह तो बीएलडब्लू है, मेरे बस की बात नही है।

एक काम कर सकते हो, टैक्सी में एक सीट खाली है, पति, पत्नी कुफरी से लौट कर शिमला जा रहे हैं।

उनसे पूछ तो, तो एक बैठ कर शिमला तक पहुंच जाऔगे। वहां से मैकेनिक लेकर ठीक करवा सकतो हो। टैक्सी में बैठे पति, पत्नी ने इजाजत दे दी।

कुमार टैक्सी में बैठ कर शिमला की ओर रवाना हुआ। प्रशान्त कार में बैठ गया। प्रशान्त पायल और कामना बातें करते हे समय व्यतीत कर रहे थे।

धुन्ध बढती जा रही थी। थोडी देर बाद प्रशान्त पेशाब करने के लिए कार से उतरा। कामना, पायल कार में बैठे बोर हो गई थी।,

मौसम का लुत्फ उठाने के लिए दोनों बाहर कार से उतरी। कपकपाने वाली ठंड थी। “कार में बैठो। बहुत ठंड है। कुल्फी जम जाएगी।“ प्रशान्त ने दोनों से कहा।

“बस दो मिन्ट मौसम का लुत्फ लेने दो, फिर कार में बैठते हैं।“ पायल और कामना ने प्रशान्त को कहा। “भूतिया माहौल है। कार में बैठते है।“ प्रशान्त ने कहा।

प्रशान्त की बात सुन कर पायल खिलखिला कर हंस दी। “भूतिया माहौल नही, मुझे तो फिल्मी माहौल लग रहा है।

किसी भी फिल्म की शूटिंग के लिए परफेक्ट लोकेशन है। काली अंधेरी रात, धुन्ध के साथ सुनसान पहाडी सडक।

हीरो, हीरोइन का रोमांटिक मूड, सेनसुएस सौंग। कौन सा गीत याद आ रहा है।“

“तुम दोनों गाऔ। मेरा रोमांटिक पार्टनर तो मैकेनिक लेने गया है।“ कामना ने ठंडी आह भर कर कहा।

तीनों हंस पडे। तीनों अपनी बातों में मस्त थे। उनको मालूम ही नही पडा, कि कोई उन के पास आया है।

एक शख्स जिसने केवल टीशर्ट, पैंट पहनी हुई थी, प्रशान्त के पास आ कर बोला “आपके पास क्या माचिस है?”

इतना सुन कर तीनों चौंक गए। जहां तीनों ठंड में कांप रहे थे, वही वह शख्स केवल टीशर्ट और पैंट पहने खडा था, कोई ठंड नही लग रही थी उसे।

प्रशान्त ने उसे ऊपर से नीचे तक गौर से देख कर कहा। “आपको ठंड नही लग रही क्या?”

उसने प्रशान्त के इस प्रश्न का कोई उत्तर नही दिया बल्कि बात करने लगा “आप भूतिया माहौल की अभी बातें कर रहे थे।

क्या आप भूतों में विश्वास करते हैं? क्या आपने कभी भूत देखा है?”

“नही, दिल्ली में रहते है, न तो कभी देखा है और न कभी विश्वास किया है, भूतों पर।“ प्रशान्त ने कह कर पूछा, “क्या आप विश्वास करते है?“

“हम पहाडी आदमी है, हर पहाडी भूतों को मानता है। उन का अस्तित्व होता है।“

उस शख्स की भूतों की बाते सुन कर कामना और पायल से रहा नही गया। उनकी उत्सुक्ता बढ गई।, “भाई, कुछ बताऔ, भूतों के बारे में। फिल्मी माहौल हो रखा है, कुछ बात बताऔ।“,

उस शख्स ने कहा “देखिए, हम तो मानते है। आप जैसा कह रहे हैं, कि शहरों में भूत नजर नही आते, हो सकता है, नजर नहीं आते होगें

मगर पहाडों में तो हम अक्सर देखते रहते है। “कहां से आते है भूत और कैसे होते हैं, कैसे नजर आते है।“ प्रशान्त ने पूछा।

उस शख्स के हाथ में सिगरेट थी, वह सिगरेट को हाथों में घुमाता हुआ बोला “भूत हमारे आपके जैसे ही होते हैं। वे रौशनी में नजर नही आते है।“

“होते कौन है भूत, कैसे बनते है?“ पायल ने पूछा। “यहां पहाडों के लोगों का मानना है, कि जो अकस्मास किसी दुर्घटना में मौत के शिकार होते है

या फिर जिनका कत्ल कर दिया जाता है, वे भूत बनते है।“ उस शख्स ने कहा। “क्या वे किसो को नुकसान पहुंचाते है, मारपीट करते हैं?” प्रशान्त ने पूछा।

“अच्छे भूत किसी को कुछ नुकसान पहुंचाते है। अच्छा मैं चलता हूं। सिगरेट मेरे पास है। आप के पास माचिस है, तो दीजिए, सिगरेट सुलगा लेता हूं। “ उस शख्स ने कहा, प्रशान्त ने लाईटर निकाल कर जलाया। उस शख्स ने सिगरेट सुलगाई, लाईटर की रौशनी में सिर्फ सिगरेट नजर आई

वह शख्स गायब हो गया। लाईटर बंद होते ही वह शख्स नजर आया। तीनों के मुख से एक साथ निकला – भूत।

तीनों, प्रशान्त, पायल और कामना का शरीर अकड गया और बेसुध होकर एक दूसरे पर गिर पडे।

अकडा शरीर, खुली आंखें लगभग मृत्य देह के सामान तीनों मूर्क्षित थे। वह शख्स कुछ दूरी पर खडा सिगरेट पी रहा था।

तभी वहां आर्मी का ट्रक गुजरा। उसने ट्रक को रूकने का ईशारा किया। ट्रक ड्राईवर उसे देख कर समझ गया, कि वह कौन है।,

ट्रक से आर्मी के जवान उतरे और तीनों को ट्रक पर डाला और शिमला के अस्पताल में भरती कराया।

कुछ देर बाद कुमार कार मैकेनिक के साथ एक टैक्सी में आया। अकेली कार को देख परेशान हो गया, कि तीनों कहां गये।

वह शख्स, जो कुछ दूरी पर था, कुमार को बताया, कि ठंड में तीनों की तबीयत खराब हो गई, आर्मी के जवान उन्हें अस्पातल ले गये हैं।,

कह कर वह शख्स विपरीत दिशा की ओर चल दिया। मैकेनिक ने कार ठीक की और कुछ देर बाद शिमला की ओर रवाना हुए।

कुमार सीधा अस्पताल गया। डाक्टर से बात की। डाक्टर ने कहा कि तीनों को सदमा लगा है। वैसे घबराने की कोई आवश्कता नही है

लेकिन सदमें से उभरने में समय लगेगा। कुमार को कुछ समझ नही आया, कि उन्होनें क्या देखा, कि इतने सदमे में आ गए।

अगली सुबह आर्मी ऑफिसर अस्पताल में तीनों को देखने आया। कुमार से कहा – “आई एम कर्नल अरोडा, मेरी यूनिट ने इन तीनों को अस्पातल एडमिट कराया था।“

कुमार ने पूछा – “मुझे कुछ समझ में नही आ रहा, कि अचानक से क्या हो गया?“

कर्नल अरोडा ने कुमार को रात की बात विस्तार से बताई, कि वह शख्स भूत था, जिसे देख कर तीनों सदमें में चले गए और बेसुध हो गए।

वह एक अच्छा भूत था। अच्छे भूत किसी का नुकसान नही करते। उसने तीनों की मदद की। हमारे ट्रक को रोका और कुमार के वापिस आने तक भी रूका रहा।

शाम तक तीनों को होश आ गया। दो दिन बाद अस्पताल से छुट्टी मिली और सभी दिल्ली वापिस गए, लेकिन सदमें से उभरने में लगभग तीन महीने लग गए।

आज सात साल बीत गए उस घटना को। चारों कभी भी घूमने रात को नही निकलते। नाईट लाईफ बंद कर दी।

घर से ऑफिस और ऑफिस से घर, बस यही रूटीन है उन का। उस घटना को याद करके आज भी उनका बदन ठंडा होने लगता है।


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